कुदरत का उपहार ‘मोती’


चाहे कोई दौर हो, मोती हमेशा फैशन में टॉप पर रहता है। मोती का लैटिन भाषा में अर्थ है ‘अद्वितीय’, क्योंकि हर मोती अपने आपमें खास होता है। आइए डालते हैं एक नजर इस रत्न पर
-कल्चर्ड मोतियों का उत्पादन करने में जापान का विश्व में प्रथम स्थान है।
-यह एकमात्र रत्न है जिसे तराशे या पालिश किए बगैर भी आभूषणों में प्रयोग किया जा सकता है।
-मोतियों को हमेशा दूसरे रत्नों से अलग पाउच में रखें।
-लगातार पसीने के संपर्क में आने पर मोती अपनी आभा खो बैठते हैं। इसलिए, प्रत्येक बार प्रयोग करने के बाद इन्हें नरम कपड़े से पोछें।
-गर्मी से मोतियों का रंग भूरा पड़ सकता है और यह सूख जाने के कारण चटक सकते हैं। क्या आपको पता है कि मोती भी सांस लेते हैं, इसलिए इन्हें एअरटाइट डिब्बे में न रखें।
-कॉस्मेटिक और परफ्यूम का प्रयोग करते समय मोतियों की माला उतार लें। साथ ही मोतियों को खुरदरे कपड़े की रगड़ से बचाएं।
-त्वचा में मौजूद नमी मोतियों के लिए जादू सा कार्य करती है, लेकिन पसीने इनके लिए नुकसानदेह होता है।
-मोती के आभूषणों को प्रयोग करते समय हमेशा धातु वाला सिरा पकड़ें। इससे मोती आभूषण से ढीले नहीं होंगे।


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